॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.2.10
अनावृष्ट्या विनङ्क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिताः।
शीतवातातपप्रावृड्हिमैरन्योन्यतः प्रजाः॥ १०
anāvṛṣṭyā vinaṅkṣyanti durbhikṣakarapīḍitāḥ|
śītavātātapaprāvṛḍ:himairanyonyataḥ prajāḥ|| 10
अर्थ
कभी वर्षा न होगी—सूखा पड़ जायगा; तो कभी कर-पर-कर लगाये जायँगे। कभी कड़ाकेकी सर्दी पड़ेगी तो कभी पाला पड़ेगा, कभी आँधी चलेगी, कभी गरमी पड़ेगी तो कभी बाढ़ आ जायगी। इन उत्पातोंसे तथा आपसके संघर्षसे प्रजा अत्यन्त पीड़ित होगी, नष्ट हो जायगी॥ १०॥