श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.20

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

विचरन्‍नाशुना क्षोण्यां हयेनाप्रतिमद्युतिः।

नृपलिंगच्छदो दस्यून् कोटिशो निहनिष्यति॥ २०

vicarannāśunā kṣoṇyāṃ hayenāpratimadyutiḥ|

nṛpaliṃgacchado dasyūn koṭiśo nihaniṣyati|| 20

अर्थ

उनके रोम-रोमसे अतुलनीय तेजकी किरणें छिटकती होंगी। वे अपने शीघ्रगामी घोड़ेसे पृथ्वीपर सर्वत्र विचरण करेंगे और राजाके वेषमें छिपकर रहनेवाले कोटि-कोटि डाकुओंका संहार करेंगे॥ २०॥

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