श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.27

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सप्तर्षीणां तु यौ पूर्वौ दृश्येते उदितौ दिवि।

तयोस्तु मध्ये नक्षत्रं दृश्यते यत् समं निशि॥ २७

saptarṣīṇāṃ tu yau pūrvau dṛśyete uditau divi|

tayostu madhye nakṣatraṃ dṛśyate yat samaṃ niśi|| 27

अर्थ

जिस समय आकाशमें सप्तर्षियोंका उदय होता है, उस समय पहले उनमेंसे दो ही तारे दिखायी पड़ते हैं। उनके बीचमें दक्षिणोत्तर रेखापर समभागमें अश्‍विनी आदि नक्षत्रोंमेंसे एक नक्षत्र दिखायी पड़ता है॥ २७॥

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