श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.35

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

इत्येष मानवो वंशो यथा संख्यायते भुवि।

तथा विट्शूद्रविप्राणां तास्ता ज्ञेया युगे युगे॥ ३५

ityeṣa mānavo vaṃśo yathā saṃkhyāyate bhuvi|

tathā viṭśūdraviprāṇāṃ tāstā jñeyā yuge yuge|| 35

अर्थ

परीक्षित्! मैंने तो तुमसे केवल मनुवंशका, सो भी संक्षेपसे वर्णन किया है। जैसे मनुवंशकी गणना होती है, वैसे ही प्रत्येक युगमें ब्राह्मण, वैश्य और शूद्रोंकी भी वंशपरम्परा समझनी चाहिये॥ ३५॥

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