॥ श्रीहरिः ॥
कृतं त्रेता द्वापरं च कलिश्चेति चतुर्युगम्।
अनेन क्रमयोगेन भुवि प्राणिषु वर्तते॥ ३९
kṛtaṃ tretā dvāparaṃ ca kaliśceti caturyugam|
anena kramayogena bhuvi prāṇiṣu vartate|| 39
अर्थ
सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग—ये ही चार युग हैं; ये पूर्वोक्त क्रमके अनुसार अपने-अपने समयमें पृथ्वीके प्राणियोंपर अपना प्रभाव दिखाते रहते हैं॥ ३९॥
कृतं त्रेता द्वापरं च कलिश्चेति चतुर्युगम्।
अनेन क्रमयोगेन भुवि प्राणिषु वर्तते॥ ३९
सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग—ये ही चार युग हैं; ये पूर्वोक्त क्रमके अनुसार अपने-अपने समयमें पृथ्वीके प्राणियोंपर अपना प्रभाव दिखाते रहते हैं॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.2.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 916) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/2/39/