श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.44

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ये ये भूपतयो राजन् भुंजन्ति भुवमोजसा।✎ 1237 1238 1239

कालेन ते कृताः सर्वे कथामात्राः कथासु च॥ ४४

ye ye bhūpatayo rājan bhuṃjanti bhuvamojasā|

kālena te kṛtāḥ sarve kathāmātrāḥ kathāsu ca|| 44

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! जो-जो नरपति बड़े उत्साह और बल-पौरुषसे इस पृथ्वीके उपभोगमें लगे रहे, उन सबको कालने अपने विकराल गालमें धर दबाया। अब केवल इतिहासमें उनकी कहानी ही शेष रह गयी है॥ ४४॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वादशस्कन्धे द्वितीयोऽध्यायः॥ २॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #1237 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भुञ्जते → भुञ्जति
  • #1238 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भुञ्जति → भुञ्ति
  • #1239 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भुञ्ति → भुंजन्ति

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