राजन्! इसीका नाम प्राकृतिक प्रलय है। इस प्रलयमें प्रलयका कारण उपस्थित होनेपर पंचभूतोंके मिश्रणसे बना हुआ ब्रह्माण्ड अपना स्थूलरूप छोड़कर कारणरूपमें स्थित हो जाता है, घुल-मिल जाता है॥ ६॥
एष प्राकृतिको राजन् प्रलयो यत्र लीयते।
आण्डकोशस्तु संघातो विघात उपसादिते॥ ६
राजन्! इसीका नाम प्राकृतिक प्रलय है। इस प्रलयमें प्रलयका कारण उपस्थित होनेपर पंचभूतोंके मिश्रणसे बना हुआ ब्रह्माण्ड अपना स्थूलरूप छोड़कर कारणरूपमें स्थित हो जाता है, घुल-मिल जाता है॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.4.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 925) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/4/6/