श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.2

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

राजोवाच

सिद्धोऽस्म्यनुगृहीतोऽस्मि भवता करुणात्मना।

श्रावितो यच्च मे साक्षादनादिनिधनो हरिः॥ २

siddho'smyanugṛhīto'smi bhavatā karuṇātmanā|

śrāvito yacca me sākṣādanādinidhano hariḥ|| 2

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने कहा—भगवन्! आप करुणाके मूर्तिमान् स्वरूप हैं। आपने मुझपर परम कृपा करके अनादि-अनन्त, एकरस, सत्य भगवान् श्रीहरिके स्वरूप और लीलाओंका वर्णन किया है। अब मैं आपकी कृपासे परम अनुगृहीत और कृतकृत्य हो गया हूँ॥ २॥

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