जनमेजयकी बात सुनकर ब्राह्मणोंने उस यज्ञमें इन्द्रके साथ तक्षकका अग्निकुण्डमें आवाहन किया। उन्होंने कहा—‘रे तक्षक! तू मरुद्गणके सहचर इन्द्रके साथ इस अग्निकुण्डमें शीघ्र आ पड़’॥ २१॥
तच्छ्रुत्वाऽऽजुहुवुर्विप्राः सहेन्द्रं तक्षकं मखे।
तक्षकाशु पतस्वेह सहेन्द्रेण मरुत्त्वता॥ २१
जनमेजयकी बात सुनकर ब्राह्मणोंने उस यज्ञमें इन्द्रके साथ तक्षकका अग्निकुण्डमें आवाहन किया। उन्होंने कहा—‘रे तक्षक! तू मरुद्गणके सहचर इन्द्रके साथ इस अग्निकुण्डमें शीघ्र आ पड़’॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 935) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/21/