श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.47

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

क्षीणायुषः क्षीणसत्त्वान् दुर्मेधान् वीक्ष्य कालतः।

वेदान् ब्रह्मर्षयो व्यस्यन् हृदिस्थाच्युतचोदिताः॥ ४७

kṣīṇāyuṣaḥ kṣīṇasattvān durmedhān vīkṣya kālataḥ|

vedān brahmarṣayo vyasyan hṛdisthācyutacoditāḥ|| 47

अर्थ

जब ब्रह्मवेत्ता ऋषियोंने देखा कि समयके फेरसे लोगोंकी आयु, शक्ति और बुद्धि क्षीण हो गयी है, तब उन्होंने अपने हृदय-देशमें विराजमान परमात्माकी प्रेरणासे वेदोंके अनेकों विभाग कर दिये॥ ४७॥

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