आपके द्वारा उपदेश किये हुए ज्ञान और विज्ञानमें परिनिष्ठित हो जानेसे मेरा अज्ञान सर्वदाके लिये नष्ट हो गया। आपने भगवान्के परम कल्याणमय स्वरूपका मुझे साक्षात्कार करा दिया है॥ ७॥
अज्ञानं च निरस्तं मे ज्ञानविज्ञाननिष्ठया।
भवता दर्शितं क्षेमं परं भगवतः पदम्॥ ७
आपके द्वारा उपदेश किये हुए ज्ञान और विज्ञानमें परिनिष्ठित हो जानेसे मेरा अज्ञान सर्वदाके लिये नष्ट हो गया। आपने भगवान्के परम कल्याणमय स्वरूपका मुझे साक्षात्कार करा दिया है॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 933) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/7/