श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.79

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

लौगाक्षिर्मांगलिः कुल्यः कुसीदः कुक्षिरेव च।

पौष्यंजिशिष्या जगृहुः संहितास्ते शतं शतम्॥ ७९

laugākṣirmāṃgaliḥ kulyaḥ kusīdaḥ kukṣireva ca|

pauṣyaṃjiśiṣyā jagṛhuḥ saṃhitāste śataṃ śatam|| 79

अर्थ

पौष्यंजिके और भी शिष्य थे—लौगाक्षि, मांगलि, कुल्य, कुसीद और कुक्षि। इसमेंसे प्रत्येकने सौ-सौ संहिताओंका अध्ययन किया॥ ७९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें