श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.7.1

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अथ सप्तमोऽध्यायः

अथर्ववेदकी शाखाएँ और पुराणोंके लक्षण

सूत उवाच

अथर्ववित् सुमन्तुश्‍च शिष्यमध्यापयत् स्वकाम्।

संहितां सोऽपि पथ्याय वेददर्शाय चोक्तवान्॥ १

atharvavit sumantuśca śiṣyamadhyāpayat svakām|

saṃhitāṃ so'pi pathyāya vedadarśāya coktavān|| 1

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! मैं कह चुका हूँ कि अथर्ववेदके ज्ञाता सुमन्तुमुनि थे। उन्होंने अपनी संहिता अपने प्रिय शिष्य कबन्धको पढ़ायी। कबन्धने उस संहिताके दो भाग करके पथ्य और वेद-दर्शको उसका अध्ययन कराया॥ १॥

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