श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.14

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तस्यैवं युंजतश्‍चित्तं महायोगेन योगिनः।

व्यतीयाय महान् कालो मन्वन्तरषडात्मकः॥ १४

tasyaivaṃ yuṃjataścittaṃ mahāyogena yoginaḥ|

vyatīyāya mahān kālo manvantaraṣaḍātmakaḥ|| 14

अर्थ

योगी मार्कण्डेयजी महायोगके द्वारा अपना चित्त भगवान्‌के स्वरूपमें जोड़ते रहे। इस प्रकार साधन करते-करते बहुत समय—छः मन्वन्तर व्यतीत हो गये॥ १४॥

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