योगी मार्कण्डेयजी महायोगके द्वारा अपना चित्त भगवान्के स्वरूपमें जोड़ते रहे। इस प्रकार साधन करते-करते बहुत समय—छः मन्वन्तर व्यतीत हो गये॥ १४॥
तस्यैवं युंजतश्चित्तं महायोगेन योगिनः।
व्यतीयाय महान् कालो मन्वन्तरषडात्मकः॥ १४
योगी मार्कण्डेयजी महायोगके द्वारा अपना चित्त भगवान्के स्वरूपमें जोड़ते रहे। इस प्रकार साधन करते-करते बहुत समय—छः मन्वन्तर व्यतीत हो गये॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.8.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 947) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/8/14/