puṣpabhadrā nadī yatra citrākhyā ca śilā vibho|| 17
अर्थ
भगवन्! वे सब उनकी आज्ञाके अनुसार उनके आश्रमपर गये। मार्कण्डेयजीका आश्रम हिमालयके उत्तरकी ओर है। वहाँ पुष्पभद्रा नामकी नदी बहती है और उसके पास ही चित्रा नामकी एक शिला है॥ १७॥
ते वै तदाश्रमं जग्मुर्हिमाद्रेः पार्श्व उत्तरे।
पुष्पभद्रा नदी यत्र चित्राख्या च शिला विभो॥ १७
भगवन्! वे सब उनकी आज्ञाके अनुसार उनके आश्रमपर गये। मार्कण्डेयजीका आश्रम हिमालयके उत्तरकी ओर है। वहाँ पुष्पभद्रा नामकी नदी बहती है और उसके पास ही चित्रा नामकी एक शिला है॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.8.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 947) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/8/17/