वसन्तका साम्राज्य देखकर कामदेवने भी वहाँ प्रवेश किया। उसके साथ गाने-बजानेवाले गन्धर्व झुंड-के-झुंड चल रहे थे, उसके चारों ओर बहुत-सी स्वर्गीय अप्सराएँ चल रही थीं और अकेला काम ही सबका नायक था। उसके हाथमें पुष्पोंका धनुष और उसपर सम्मोहन आदि बाण चढ़े हुए थे॥ २२॥
अन्वीयमानो गन्धर्वैर्गीतवादित्रयूथकैः।
अदृश्यतात्तचापेषुः स्वः स्त्रीयूथपतिः स्मरः॥ २२
वसन्तका साम्राज्य देखकर कामदेवने भी वहाँ प्रवेश किया। उसके साथ गाने-बजानेवाले गन्धर्व झुंड-के-झुंड चल रहे थे, उसके चारों ओर बहुत-सी स्वर्गीय अप्सराएँ चल रही थीं और अकेला काम ही सबका नायक था। उसके हाथमें पुष्पोंका धनुष और उसपर सम्मोहन आदि बाण चढ़े हुए थे॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.8.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 948) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/8/22/