श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.24

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

ननृतुस्तस्य पुरतः स्त्रियोऽथो गायका जगुः।

मृदंगवीणापणवैर्वाद्यं चक्रुर्मनोरमम्॥ २४

nanṛtustasya purataḥ striyo'tho gāyakā jaguḥ|

mṛdaṃgavīṇāpaṇavairvādyaṃ cakrurmanoramam|| 24

अर्थ

अब अप्सराएँ उनके सामने नाचने लगीं। कुछ गन्धर्व मधुर गान करने लगे तो कुछ मृदंग, वीणा, ढोल आदि बाजे बड़े मनोहर स्वरमें बजाने लगे॥ २४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें