श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.29

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

त इत्थमपकुर्वन्तो मुनेस्तत्तेजसा मुने।

दह्यमाना निववृतुः प्रबोध्याहिमिवार्भकाः॥ २९

ta itthamapakurvanto munestattejasā mune|

dahyamānā nivavṛtuḥ prabodhyāhimivārbhakāḥ|| 29

अर्थ

शौनकजी! मार्कण्डेय मुनि अपरिमित तेजस्वी थे। काम, वसन्त आदि आये तो थे इसलिये कि उन्हें तपस्यासे भ्रष्ट कर दें; परन्तु अब उनके तेजसे जलने लगे और ठीक उसी प्रकार भाग गये, जैसे छोटे-छोटे बच्चे सोते हुए साँपको जगाकर भाग जाते हैं॥ २९॥

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