श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.3

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

स वा अस्मत्कुलोत्पन्‍नः कल्पेऽस्मिन् भार्गवर्षभः।

नैवाधुनापि भूतानां सम्प्लवः कोऽपि जायते॥ ३

sa vā asmatkulotpannaḥ kalpe'smin bhārgavarṣabhaḥ|

naivādhunāpi bhūtānāṃ samplavaḥ ko'pi jāyate|| 3

अर्थ

परन्तु सूतजी! वे तो इसी कल्पमें हमारे ही वंशमें उत्पन्‍न हुए एक श्रेष्ठ भृगुवंशी हैं और जहाँतक हमें मालूम है, इस कल्पमें अबतक प्राणियोंका कोई प्रलय नहीं हुआ है॥ ३॥

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