श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.7

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

प्राप्तद्विजातिसंस्कारो मार्कण्डेयः पितुः क्रमात्।

छन्दांस्यधीत्य धर्मेण तपःस्वाध्यायसंयुतः॥ ७

prāptadvijātisaṃskāro mārkaṇḍeyaḥ pituḥ kramāt|

chandāṃsyadhītya dharmeṇa tapaḥsvādhyāyasaṃyutaḥ|| 7

अर्थ

शौनकजी! मृकण्ड ऋषिने अपने पुत्र मार्कण्डेयके सभी संस्कार समय-समयपर किये। मार्कण्डेयजी विधिपूर्वक वेदोंका अध्ययन करके तपस्या और स्वाध्यायसे सम्पन्‍न हो गये थे॥ ७॥

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