श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.10

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तस्यैकदा भृगुश्रेष्ठ पुष्पभद्रातटे मुनेः।

उपासीनस्य सन्ध्यायां ब्रह्मन् वायुरभून्महान्॥ १०

tasyaikadā bhṛguśreṣṭha puṣpabhadrātaṭe muneḥ|

upāsīnasya sandhyāyāṃ brahman vāyurabhūnmahān|| 10

अर्थ

शौनकजी! एक दिनकी बात है, सन्ध्याके समय पुष्पभद्रा नदीके तटपर मार्कण्डेय मुनि भगवान्‌की उपासनामें तन्मय हो रहे थे। ब्रह्मन्! उसी समय एकाएक बड़े जोरकी आँधी चलने लगी॥ १०॥

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