॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.9.21
प्रागुत्तरस्यां शाखायां तस्यापि ददृशे शिशुम्।
शयानं पर्णपुटके ग्रसन्तं प्रभया तमः॥ २१
prāguttarasyāṃ śākhāyāṃ tasyāpi dadṛśe śiśum|
śayānaṃ parṇapuṭake grasantaṃ prabhayā tamaḥ|| 21
अर्थ
बरगदके पेड़में ईशानकोणपर एक डाल थी, उसमें एक पत्तोंका दोना-सा बन गया था। उसीपर एक बड़ा ही सुन्दर नन्हा-सा शिशु लेट रहा था। उसके शरीरसे ऐसी उज्ज्वल छटा छिटक रही थी, जिससे आसपासका अँधेरा दूर हो रहा था॥ २१॥