॥ श्रीहरिः ॥
द्वितीय स्कन्ध
॥ श्रीगणेशायः नमः॥
श्रीमद्भागवतमहापुराणम्
द्वितीयः स्कन्धः
- 1अथ प्रथमोऽध्यायःध्यान-विधि और भगवान्के विराट्स्वरूपका वर्णन39 श्लोक
पृष्ठ 181 - 2अथ द्वितीयोऽध्यायःभगवान्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन37 श्लोक
पृष्ठ 186 - 3अथ तृतीयोऽध्यायःकामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद्भक्तिके प्राधान्यका निरूपण25 श्लोक
पृष्ठ 192 - 4अथ चतुर्थोऽध्यायःराजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ25 श्लोक
पृष्ठ 195 - 5अथ पञ्चमोऽध्यायःसृष्टि-वर्णन42 श्लोक
पृष्ठ 199 - 6अथ षष्ठोऽध्यायःविराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन45 श्लोक
पृष्ठ 203 - 7अथ सप्तमोऽध्यायःभगवान्के लीलावतारोंकी कथा53 श्लोक
पृष्ठ 208 - 8अथाष्टमोऽध्यायःराजा परीक्षित्के विविध प्रश्न29 श्लोक
पृष्ठ 218 - 9अथ नवमोऽध्यायःब्रह्माजीका भगवद्धामदर्शन और भगवान्के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवतका उपदेश45 श्लोक
पृष्ठ 221 - 10अथ दशमोऽध्यायःभागवतके दस लक्षण51 श्लोक
पृष्ठ 227
॥ ॐ तत्सत्॥