श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.1.24

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ततस्त्वतिव्रज्य सुराष्ट्रमृद्धं

सौवीरमत्स्यान् कुरुजाङ्गलांश्‍च।

कालेन तावद्यमुनामुपेत्य

तत्रोद्धवं भागवतं ददर्श॥ २४

tatastvativrajya surāṣṭramṛddhaṃ

sauvīramatsyān kurujāṅgalāṃśca|

kālena tāvadyamunāmupetya

tatroddhavaṃ bhāgavataṃ dadarśa|| 24

अर्थ

वहाँसे चलकर वे धन-धान्यपूर्ण सौराष्ट्र, सौवीर, मत्स्य और कुरुजांगल आदि देशोंमें होते हुए जब कुछ दिनोंमें यमुनातटपर पहुँचे, तब वहाँ उन्होंने परमभागवत उद्धवजीका दर्शन किया॥ २४॥

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