सौम्यस्वभाव उद्धवजी! अपने हृदयेश्वर भगवान् श्रीकृष्णका अनन्यभावसे अनुसरण करनेवाले जो हृदीक, सत्यभामानन्दन चारुदेष्ण और गद आदि अन्य भगवान्के पुत्र हैं, वे सब भी कुशलपूर्वक हैं न?॥ ३५॥✎ 18712951296
अपिस्विदन्ये च निजात्मदैव-
मनन्यवृत्त्या समनुव्रता ये।
हृदीकसत्यात्मजचारुदेष्ण-
गदादयः स्वस्ति चरन्ति सौम्य॥ ३५
सौम्यस्वभाव उद्धवजी! अपने हृदयेश्वर भगवान् श्रीकृष्णका अनन्यभावसे अनुसरण करनेवाले जो हृदीक, सत्यभामानन्दन चारुदेष्ण और गद आदि अन्य भगवान्के पुत्र हैं, वे सब भी कुशलपूर्वक हैं न?॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.1.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 239) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/1/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#187 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णु-भगवान् की → विष्णु-भगवान्की
#1295 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विष्णु-भगवान्की → विष्णुभगवान्की
#1296 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): स्वामि-कार्तिक → स्वामिकार्तिक