श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.10.10

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

विदुर उवाच

यदात्थ बहुरूपस्य हरेरद‍्भुतकर्मणः।

कालाख्यं लक्षणं ब्रह्मन् यथा वर्णय नः प्रभो॥ १०

yadāttha bahurūpasya hareradbhutakarmaṇaḥ|

kālākhyaṃ lakṣaṇaṃ brahman yathā varṇaya naḥ prabho|| 10

अर्थ

विदुरजीने कहा—ब्रह्मन्! आपने अद्भुतकर्मा विश्‍वरूप श्रीहरिकी जिस काल नामक शक्तिकी बात कही थी, प्रभो! उसका कृपया विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये॥ १०॥

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