॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.10.19
वनस्पत्योषधिलतात्वक्सारा वीरुधो द्रुमाः।
उत्स्रोतसस्तमः प्राया अन्तःस्पर्शा विशेषिणः॥ १९
vanaspatyoṣadhilatātvaksārā vīrudho drumāḥ|
utsrotasastamaḥ prāyā antaḥsparśā viśeṣiṇaḥ|| 19
अर्थ
टिप्पणियाँ
- १
जो बिना मौर आये ही फलते हैं, जैसे गूलर, बड़, पीपल आदि।
- २
जो फलोंके पक जानेपर नष्ट हो जाते हैं, जैसे धान, गेहूँ, चना आदि।
- ३
जो किसीका आश्रय लेकर बढ़ते हैं, जैसे ब्राह्मी, गिलोय आदि।
- ४
जिनकी छाल बहुत कठोर होती है, जैसे बाँस आदि।
- ५
जो लता पृथ्वीपर ही फैलती है, किन्तु कठोर होनेसे ऊपरकी ओर नहीं चढ़ती—जैसे खरबूजा, तरबूजा आदि।
- ६
जिनमें पहले फूल आकर फिर उन फूलोंके स्थानमें ही फल लगते हैं, जैसे आम, जामुन आदि।