प्रबल तपस्या एवं हृदयमें स्थित आत्मज्ञानसे उनका विज्ञानबल बढ़ गया और उन्होंने जलके साथ वायुको पी लिया॥ ६॥
तपसा ह्येधमानेन विद्यया चात्मसंस्थया।
विवृद्धविज्ञानबलो न्यपाद् वायुं सहाम्भसा॥ ६
प्रबल तपस्या एवं हृदयमें स्थित आत्मज्ञानसे उनका विज्ञानबल बढ़ गया और उन्होंने जलके साथ वायुको पी लिया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.10.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 278) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/10/6/