कालक्रमसे जब ब्रह्माजीका दिन बीत जाता है, तब वे तमोगुणके सम्पर्कको स्वीकार कर अपने सृष्टिरचनारूप पौरुषको स्थगित करके निश्चेष्टभावसे स्थित हो जाते हैं॥ २७॥✎ 246247
तमोमात्रामुपादाय प्रतिसंरुद्धविक्रमः।
कालेनानुगताशेष आस्ते तूष्णीं दिनात्यये॥ २७
कालक्रमसे जब ब्रह्माजीका दिन बीत जाता है, तब वे तमोगुणके सम्पर्कको स्वीकार कर अपने सृष्टिरचनारूप पौरुषको स्थगित करके निश्चेष्टभावसे स्थित हो जाते हैं॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 285) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/11/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)