श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.31

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

अन्तः स तस्मिन् सलिल आस्तेऽनन्तासनो हरिः।

योगनिद्रानिमीलाक्षः स्तूयमानो जनालयैः॥ ३१

antaḥ sa tasmin salila āste'nantāsano hariḥ|

yoganidrānimīlākṣaḥ stūyamāno janālayaiḥ|| 31

अर्थ

तब उस जलके भीतर भगवान् शेषशायी योगनिद्रासे नेत्र मूँदकर शयन करते हैं। उस समय जनलोकनिवासी मुनिगण उनकी स्तुति किया करते हैं॥ ३१॥✎ 246 247

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #246 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #247 शब्दोंके बीचका स्थान: २४॥यह → २४॥ यह

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