श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.4

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

सनकं च सनन्दं च सनातनमथात्मभूः।

सनत्कुमारं च मुनीन्‍निष्क्रियानूर्ध्वरेतसः॥ ४

sanakaṃ ca sanandaṃ ca sanātanamathātmabhūḥ|

sanatkumāraṃ ca munīnniṣkriyānūrdhvaretasaḥ|| 4

अर्थ

इस बार ब्रह्माजीने सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार—ये चार निवृत्तिपरायण ऊर्ध्वरेता मुनि उत्पन्‍न किये॥ ४॥✎ 1590

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1590 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: बुद्धि-द्वारा → बुद्धिद्वारा

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