श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.56

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

आकूतिं रुचये प्रादात्कर्दमाय तु मध्यमाम्।

दक्षायादात्प्रसूतिं च यत आपूरितं जगत्॥ ५६

ākūtiṃ rucaye prādātkardamāya tu madhyamām|

dakṣāyādātprasūtiṃ ca yata āpūritaṃ jagat|| 56

अर्थ

मनुजीने आकूतिका विवाह रुचि प्रजापतिसे किया, मझली कन्या देवहूति कर्दमजीको दी और प्रसूति दक्ष प्रजापतिको। इन तीनों कन्याओंकी सन्ततिसे सारा संसार भर गया॥ ५६॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां तृतीयस्कन्धे द्वादशोऽध्यायः॥ १२॥

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