श्रीमैत्रेयजीने कहा—पृथ्वीको इस प्रकार अथाह जलमें डूबी देखकर ब्रह्माजी बहुत देरतक मनमें यह सोचते रहे कि ‘इसे कैसे निकालूँ॥ १६॥
परमेष्ठी त्वपां मध्ये तथा सन्नामवेक्ष्य गाम्।
कथमेनां समुन्नेष्य इति दध्यौ धिया चिरम्॥ १६
श्रीमैत्रेयजीने कहा—पृथ्वीको इस प्रकार अथाह जलमें डूबी देखकर ब्रह्माजी बहुत देरतक मनमें यह सोचते रहे कि ‘इसे कैसे निकालूँ॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 293) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/13/16/