श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.13.47

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

स इत्थं भगवानुर्वीं विष्वक्सेनः प्रजापतिः।

रसाया लीलयोन्‍नीतामप्सु न्यस्य ययौ हरिः॥ ४७

sa itthaṃ bhagavānurvīṃ viṣvaksenaḥ prajāpatiḥ|

rasāyā līlayonnītāmapsu nyasya yayau hariḥ|| 47

अर्थ

इस प्रकार रसातलसे लीलापूर्वक लायी हुई पृथ्वीको जलपर रखकर वे विष्वक्सेन प्रजापति भगवान् श्रीहरि अन्तर्धान हो गये॥ ४७॥✎ 256

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #256 शब्दोंके बीचका स्थान: वराहभगवान् ने → वराहभगवान्‌ने

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