॥ श्रीहरिः ॥
तेनैव तु मुनिश्रेष्ठ हरिणा यज्ञमूर्तिना।
आदिदैत्यो हिरण्याक्षो हत इत्यनुशुश्रुम॥ २
tenaiva tu muniśreṣṭha hariṇā yajñamūrtinā|
ādidaityo hiraṇyākṣo hata ityanuśuśruma|| 2
अर्थ
विदुरजीने कहा—मुनिवर! हमने यह बात आपके मुखसे अभी सुनी है कि आदिदैत्य हिरण्याक्षको भगवान् यज्ञमूर्तिने ही मारा था॥ २॥
तेनैव तु मुनिश्रेष्ठ हरिणा यज्ञमूर्तिना।
आदिदैत्यो हिरण्याक्षो हत इत्यनुशुश्रुम॥ २
विदुरजीने कहा—मुनिवर! हमने यह बात आपके मुखसे अभी सुनी है कि आदिदैत्य हिरण्याक्षको भगवान् यज्ञमूर्तिने ही मारा था॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 299) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/14/2/