श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.2

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

विदुर उवाच

तेनैव तु मुनिश्रेष्ठ हरिणा यज्ञमूर्तिना।

आदिदैत्यो हिरण्याक्षो हत इत्यनुशुश्रुम॥ २

tenaiva tu muniśreṣṭha hariṇā yajñamūrtinā|

ādidaityo hiraṇyākṣo hata ityanuśuśruma|| 2

अर्थ

विदुरजीने कहा—मुनिवर! हमने यह बात आपके मुखसे अभी सुनी है कि आदिदैत्य हिरण्याक्षको भगवान् यज्ञमूर्तिने ही मारा था॥ २॥

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