श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.37

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

कश्यप उवाच

अप्रायत्यादात्मनस्ते दोषान्मौहूर्तिकादुत।

मन्‍निदेशातिचारेण देवानां चातिहेलनात्॥ ३७

aprāyatyādātmanaste doṣānmauhūrtikāduta|

mannideśāticāreṇa devānāṃ cātihelanāt|| 37

अर्थ

कश्यपजीने कहा—तुम्हारा चित्त कामवासनासे मलिन था, वह समय भी ठीक नहीं था और तुमने मेरी बात भी नहीं मानी तथा देवताओंकी भी अवहेलना की॥ ३७॥

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