श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.41

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

दितिरुवाच

वधं भगवता साक्षात्सुनाभोदारबाहुना।

आशासे पुत्रयोर्मह्यं मा क्रुद्धाद‍्ब्राह्मणाद्विभो॥ ४१

vadhaṃ bhagavatā sākṣātsunābhodārabāhunā|

āśāse putrayormahyaṃ mā kruddhādbrāhmaṇādvibho|| 41

अर्थ

दितिने कहा—प्रभो! यही मैं भी चाहती हूँ कि यदि मेरे पुत्रोंका वध हो तो वह साक्षात् भगवान् चक्रपाणिके हाथसे ही हो, कुपित ब्राह्मणोंके शापादिसे न हो॥ ४१॥

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