sa tvaṃ vidhatsva śaṃ bhūmaṃstamasā luptakarmaṇām|
adabhradayayā dṛṣṭyā āpannānarhasīkṣitum|| 9
अर्थ
भूमन्! इस अन्धकारके कारण दिन-रातका विभाग अस्पष्ट हो जानेसे लोकोंके सारे कर्म लुप्त होते जा रहे हैं, जिससे वे दुःखी हो रहे हैं; उनका कल्याण कीजिये और हम शरणागतोंकी ओर अपनी अपार दयादृष्टिसे निहारिये॥ ९॥
स त्वं विधत्स्व शं भूमंस्तमसा लुप्तकर्मणाम्।
अदभ्रदयया दृष्ट्या आपन्नानर्हसीक्षितुम्॥ ९
भूमन्! इस अन्धकारके कारण दिन-रातका विभाग अस्पष्ट हो जानेसे लोकोंके सारे कर्म लुप्त होते जा रहे हैं, जिससे वे दुःखी हो रहे हैं; उनका कल्याण कीजिये और हम शरणागतोंकी ओर अपनी अपार दयादृष्टिसे निहारिये॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.15.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 305) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/15/9/