yoginaḥ sa bhavān kiṃsvidanugṛhyeta yatparaiḥ|| 19
अर्थ
आपकी कृपासे निवृत्तिपरायण योगीजन सहजमें ही मृत्युरूप संसारसागरसे पार हो जाते हैं; फिर भला, दूसरा कोई आपपर क्या कृपा कर सकता है॥ १९॥
तरन्ति ह्यञ्जसा मृत्युं निवृत्ता यदनुग्रहात्।
योगिनः स भवान् किंस्विदनुगृह्येत यत्परैः॥ १९
आपकी कृपासे निवृत्तिपरायण योगीजन सहजमें ही मृत्युरूप संसारसागरसे पार हो जाते हैं; फिर भला, दूसरा कोई आपपर क्या कृपा कर सकता है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.16.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 314) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/16/19/