इस समय दितिके गर्भमें स्थित जो कश्यपजीका उग्र तेज है, उसमें भगवान्के उन पार्षदप्रवरोंने ही प्रवेश किया है॥ ३५॥
तावेव ह्यधुना प्राप्तौ पार्षदप्रवरौ हरेः।
दितेर्जठरनिर्विष्टं काश्यपं तेज उल्बणम्॥ ३५
इस समय दितिके गर्भमें स्थित जो कश्यपजीका उग्र तेज है, उसमें भगवान्के उन पार्षदप्रवरोंने ही प्रवेश किया है॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.16.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 317) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/16/35/