॥ श्रीहरिः ॥
अथ सप्तदशोऽध्यायः
हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षका जन्म तथा हिरण्याक्षकी दिग्विजय
मैत्रेय उवाच
निशम्यात्मभुवा गीतं कारणं शङ्कयोज्झिताः।
ततः सर्वे न्यवर्तन्त त्रिदिवाय दिवौकसः॥ १
niśamyātmabhuvā gītaṃ kāraṇaṃ śaṅkayojjhitāḥ|
tataḥ sarve nyavartanta tridivāya divaukasaḥ|| 1
अर्थ
श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! ब्रह्माजीके कहनेसे अन्धकारका कारण जानकर देवताओंकी शंका निवृत्त हो गयी और फिर वे सब स्वर्गलोकको लौट आये॥ १॥
निशम्यात्मभुवा गीतं कारणं शङ्कयोज्झिताः।
ततः सर्वे न्यवर्तन्त त्रिदिवाय दिवौकसः॥ १
श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! ब्रह्माजीके कहनेसे अन्धकारका कारण जानकर देवताओंकी शंका निवृत्त हो गयी और फिर वे सब स्वर्गलोकको लौट आये॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.17.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 317) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/17/1/