श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.17.14

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

ग्रहान् पुण्यतमानन्ये भगणांश्चापि दीपिताः।

अतिचेरुर्वक्रगत्या युयुधुश्‍च परस्परम्॥ १४

grahān puṇyatamānanye bhagaṇāṃścāpi dīpitāḥ|

aticerurvakragatyā yuyudhuśca parasparam|| 14

अर्थ

शनि, राहु आदि क्रूर ग्रह प्रबल होकर चन्द्र, बृहस्पति आदि सौम्य ग्रहों तथा बहुत-से नक्षत्रोंको लाँघकर वक्रगतिसे चलने लगे तथा आपसमें युद्ध करने लगे॥ १४॥

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