॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.18.22
ब्रह्मोवाच
एष ते देव देवानामङ्घ्रिमूलमुपेयुषाम्।
विप्राणां सौरभेयीणां भूतानामप्यनागसाम्॥ २२
eṣa te deva devānāmaṅghrimūlamupeyuṣām|
viprāṇāṃ saurabheyīṇāṃ bhūtānāmapyanāgasām|| 22
अर्थ
श्रीब्रह्माजीने कहा—देव! मुझसे वर पाकर यह दुष्ट दैत्य बड़ा प्रबल हो गया है। इस समय यह आपके चरणोंकी शरणमें रहनेवाले देवताओं, ब्राह्मणों, गौओं तथा अन्य निरपराध जीवोंको बहुत ही हानि पहुँचानेवाला, दुःखदायी और भयप्रद हो रहा है। इसकी जोड़का और कोई योद्धा नहीं है, इसलिये यह महाकण्टक अपना मुकाबला करनेवाले वीरकी खोजमें समस्त लोकोंमें घूम रहा है॥ २२-२३॥ ✎ 280