इस समय अभिजित् नामक मंगलमय मुहूर्तका भी योग आ गया है। अतः अपने सुहृद् हमलोगोंके कल्याणके लिये शीघ्र ही इस दुर्जय दैत्यसे निपट लीजिये॥ २७॥
अधुनैषोऽभिजिन्नाम योगो मौहूर्तिको ह्यगात्।
शिवाय नस्त्वं सुहृदामाशु निस्तर दुस्तरम्॥ २७
इस समय अभिजित् नामक मंगलमय मुहूर्तका भी योग आ गया है। अतः अपने सुहृद् हमलोगोंके कल्याणके लिये शीघ्र ही इस दुर्जय दैत्यसे निपट लीजिये॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.18.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 324) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/18/27/