बहुत-से पैदल, घुड़सवार, रथी और हाथियोंपर चढ़े सैनिकोंके साथ आततायी यक्ष-राक्षसोंका ‘मारो-मारो, काटो-काटो’ ऐसा अत्यन्त क्रूर और हिंसामय कोलाहल सुनायी देने लगा॥ २१॥✎ 286287
बहुभिर्यक्षरक्षोभिः पत्त्यश्वरथकुञ्जरैः।
आततायिभिरुत्सृष्टा हिंस्रा वाचोऽतिवैशसाः॥ २१
बहुत-से पैदल, घुड़सवार, रथी और हाथियोंपर चढ़े सैनिकोंके साथ आततायी यक्ष-राक्षसोंका ‘मारो-मारो, काटो-काटो’ ऐसा अत्यन्त क्रूर और हिंसामय कोलाहल सुनायी देने लगा॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 326) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)