उसमें अधिष्ठित होनेपर उनकी नाभिसे सहस्र सूर्योंके समान अत्यन्त देदीप्यमान एक कमल प्रकट हुआ, जो सम्पूर्ण जीव-समुदायका आश्रय था। उसीसे स्वयं ब्रह्माजीका भी आविर्भाव हुआ है॥ १६॥✎ 293294295
तस्य नाभेरभूत्पद्मं सहस्रार्कोरुदीधिति।
सर्वजीवनिकायौको यत्र स्वयमभूत्स्वराट्॥ १६
उसमें अधिष्ठित होनेपर उनकी नाभिसे सहस्र सूर्योंके समान अत्यन्त देदीप्यमान एक कमल प्रकट हुआ, जो सम्पूर्ण जीव-समुदायका आश्रय था। उसीसे स्वयं ब्रह्माजीका भी आविर्भाव हुआ है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 330) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#293 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने