विदुरजी बड़े ही भगवद्भक्त और भगवान् श्रीकृष्णके अनन्य सुहृद् थे। इसीलिये उन्होंने अपने बड़े भाई धृतराष्ट्रको, उनके पुत्र दुर्योधनके सहित, भगवान् श्रीकृष्णका अनादर करनेके कारण अपराधी समझकर त्याग दिया था॥ २॥✎ 291
क्षत्ता महाभागवतः कृष्णस्यैकान्तिकः सुहृत्।
यस्तत्याजाग्रजं कृष्णे सापत्यमघवानिति॥ २
विदुरजी बड़े ही भगवद्भक्त और भगवान् श्रीकृष्णके अनन्य सुहृद् थे। इसीलिये उन्होंने अपने बड़े भाई धृतराष्ट्रको, उनके पुत्र दुर्योधनके सहित, भगवान् श्रीकृष्णका अनादर करनेके कारण अपराधी समझकर त्याग दिया था॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 329) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)