॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.20.21
देवस्तानाह संविग्नो मा मां जक्षत रक्षत।
अहो मे यक्षरक्षांसि प्रजा यूयं बभूविथ॥ २१
devastānāha saṃvigno mā māṃ jakṣata rakṣata|
aho me yakṣarakṣāṃsi prajā yūyaṃ babhūvitha|| 21
अर्थ
ब्रह्माजीने घबराकर उनसे कहा—‘अरे यक्ष-राक्षसो! तुम मेरी सन्तान हो; इसलिये मुझे भक्षण मत करो, मेरी रक्षा करो!’ (उनमेंसे जिन्होंने कहा ‘खा जाओ’, वे यक्ष हुए और जिन्होंने कहा ‘रक्षा मत करो’, वे राक्षस कहलाये)॥ २१॥