श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.21

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

देवस्तानाह संविग्नो मा मां जक्षत रक्षत।

अहो मे यक्षरक्षांसि प्रजा यूयं बभूविथ॥ २१

devastānāha saṃvigno mā māṃ jakṣata rakṣata|

aho me yakṣarakṣāṃsi prajā yūyaṃ babhūvitha|| 21

अर्थ

ब्रह्माजीने घबराकर उनसे कहा—‘अरे यक्ष-राक्षसो! तुम मेरी सन्तान हो; इसलिये मुझे भक्षण मत करो, मेरी रक्षा करो!’ (उनमेंसे जिन्होंने कहा ‘खा जाओ’, वे यक्ष हुए और जिन्होंने कहा ‘रक्षा मत करो’, वे राक्षस कहलाये)॥ २१॥

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