श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.26

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

पाहि मां परमात्मंस्ते प्रेषणेनासृजं प्रजाः।

ता इमा यभितुं पापा उपाक्रामन्ति मां प्रभो॥ २६

pāhi māṃ paramātmaṃste preṣaṇenāsṛjaṃ prajāḥ|

tā imā yabhituṃ pāpā upākrāmanti māṃ prabho|| 26

अर्थ

‘परमात्मन्! मेरी रक्षा कीजिये; मैंने तो आपकी ही आज्ञासे प्रजा उत्पन्‍न की थी, किन्तु यह तो पापमें प्रवृत्त होकर मुझको ही तंग करने चली है॥ २६॥

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