‘परमात्मन्! मेरी रक्षा कीजिये; मैंने तो आपकी ही आज्ञासे प्रजा उत्पन्न की थी, किन्तु यह तो पापमें प्रवृत्त होकर मुझको ही तंग करने चली है॥ २६॥
पाहि मां परमात्मंस्ते प्रेषणेनासृजं प्रजाः।
ता इमा यभितुं पापा उपाक्रामन्ति मां प्रभो॥ २६
‘परमात्मन्! मेरी रक्षा कीजिये; मैंने तो आपकी ही आज्ञासे प्रजा उत्पन्न की थी, किन्तु यह तो पापमें प्रवृत्त होकर मुझको ही तंग करने चली है॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 331) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/26/