॥ श्रीहरिः ॥
विससर्ज तनुं तां वै ज्योत्स्नां कान्तिमतीं प्रियाम्।
त एव चाददुः प्रीत्या विश्वावसुपुरोगमाः॥ ३९
visasarja tanuṃ tāṃ vai jyotsnāṃ kāntimatīṃ priyām|
ta eva cādaduḥ prītyā viśvāvasupurogamāḥ|| 39
अर्थ
उन्होंने ज्योत्स्ना (चन्द्रिका)-रूप अपने उस कान्तिमय प्रिय शरीरको त्याग दिया। उसीको विश्वावसु आदि गन्धर्वोंने प्रसन्नतापूर्वक ग्रहण किया ॥ ३९॥
विससर्ज तनुं तां वै ज्योत्स्नां कान्तिमतीं प्रियाम्।
त एव चाददुः प्रीत्या विश्वावसुपुरोगमाः॥ ३९
उन्होंने ज्योत्स्ना (चन्द्रिका)-रूप अपने उस कान्तिमय प्रिय शरीरको त्याग दिया। उसीको विश्वावसु आदि गन्धर्वोंने प्रसन्नतापूर्वक ग्रहण किया ॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 333) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/39/